सुनों नहरों की पुकार मिशन की शुरूआत डॉ. जसमैर सिंह जी द्वारा 5 सितम्बर 2021 को की गई दिल्ली बाईपास के नजदीक लगती नहर को देखकर मन काफी दुःखी हुआ तो डॉ. जसमैर सिंह जी द्वारा इसे एक संकल्प में तबदील कर दिया कि किस प्रकार से लोगों की आस्था को शुद्ध आस्था बनाया जाए और जल को दूषित होने से बचाया जाए। शुरूआत में डॉ. जसमैर सिंह जी अकेले थे परंतु आज अनेकों सदस्य इनके साथ जुड़ चुके हैं। संस्था किसी से पैसे का दान नहीं लेती सिर्फ समय मांगती है। संस्था के स्वयंसेवक प्रतिदिन सायं 3 बजे से लेकर 7 बजे तक नहर पर ही खड़े होते हैं और लोगों को आस्था के नाम पर जल को दूषित न करने की सलाह देते हैं और बताते हैं कि प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान के लिए भी स्वच्छ जल ही चाहिए होता है। बहुत से लोग विरोध भी करते हैं और बहुत से लोग बात को समझते भी हैं। संस्था के प्रयासों से हिसार एवं बहादुरगढ़ में भी शाखाएं खुल चुकी हैं। वहाँ की नहरों पर भी लोग खड़े होकर लोगों को जागरूक करते हैं। विद्यार्थियों को समझाने के संस्था सदस्य अलग-अलग विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जाते हैं और अपने व्यक्तव्य के माध्यम से एवं नाटक के माध्यम से बच्चों में शुद्ध आस्था एवं शुद्ध जल के बीज बोते हैं। पर्यावरण संरक्षण ही स्वयं का संरक्षण है यह बात हर विद्यार्थी को बताते हैं। विशेष दिनों में नहरों के आस पास की सफाई भी की जाती हैं। इस मिशन में 14 साल से लेकर 84 साल तक के लोग मिलकर सेवा करते हैं।